
शिमला। हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने अभी से संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में पिछले विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन की समीक्षा करते हुए उन कारणों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिनकी वजह से कई सीटों पर पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा था।
बैठक में विशेष रूप से उन नेताओं और कार्यकर्ताओं पर चर्चा हुई, जिन्होंने पिछली बार टिकट नहीं मिलने पर बगावत कर पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ा या संगठन से दूरी बना ली थी। पार्टी ने ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को समय रहते फिर से संगठन के साथ जोड़ने की रणनीति पर जोर दिया।
20 से अधिक सीटों पर नाराजगी बनी हार का कारण
सूत्रों के अनुसार, बैठक में बताया गया कि पिछले विधानसभा चुनाव में 20 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी को अपने ही नेताओं की नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ा। कई स्थानों पर असंतुष्ट उम्मीदवारों ने भाजपा प्रत्याशियों के वोट काटे, जिससे पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। इन अनुभवों को देखते हुए संगठन ने इस बार पहले से ही संवाद और समन्वय की नीति अपनाने का फैसला किया है।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि अनुभवी नेताओं और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी चुनावी दृष्टि से संगठन को मजबूती प्रदान करेगी। बैठक में संगठन विस्तार, बूथ स्तर को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण, जनसंपर्क अभियान को तेज करने तथा सरकार की नीतियों और उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।
