
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देशभर के सरकारी और निजी विद्यालयों में स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के गठन और संचालन को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत विद्यालयों के संचालन, निगरानी और विकास की जिम्मेदारी अब प्रबंधन समितियां निभाएंगी। इन समितियों में 75 प्रतिशत सदस्य विद्यार्थियों के अभिभावक एवं संरक्षक होंगे, जबकि विद्यालय के प्रधानाचार्य समिति के सचिव के रूप में कार्य करेंगे।
नई व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक समिति का कार्यकाल दो वर्ष होगा, जिसके बाद नई समिति का गठन किया जाएगा। समिति विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता, विद्यार्थियों की उपस्थिति, विद्यालय के रखरखाव, मध्याह्न भोजन (पीएम-पोषण) की निगरानी तथा स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की देखरेख करेगी। साथ ही विद्यालय के विकास के लिए तीन वर्षीय रोडमैप भी तैयार करेगी।
विद्यालय में छात्रों की संख्या के आधार पर समिति का आकार तय होगा। 100 तक छात्रों वाले विद्यालयों में 12 से 15 सदस्य, जबकि 500 से अधिक छात्रों वाले विद्यालयों में 20 से 25 सदस्य होंगे। शेष 25 प्रतिशत सदस्यों में स्थानीय निकाय प्रतिनिधि, शिक्षक, शिक्षा विशेषज्ञ, नर्स तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शामिल किए जाएंगे। शिक्षा मंत्रालय का उद्देश्य समाज की भागीदारी बढ़ाकर विद्यालयों में बेहतर शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
