
शिमला, 20 जून। सनातन धर्म में नवरात्रों का विशेष महत्व माना जाता है। वर्ष में आने वाले दो गुप्त नवरात्रों में आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि को विशेष रूप से साधना, आध्यात्मिक उन्नति और देवी उपासना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस दौरान नौ दुर्गाओं के साथ-साथ दस महाविद्याओं की पूजा-अर्चना का भी विशेष विधान है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 का शुभारंभ 15 जुलाई को घटस्थापना के साथ होगा। यह पर्व 23 जुलाई 2026 को नवमी तिथि के दिन संपन्न होगा। श्रद्धालु इस अवधि में देवी शक्ति की आराधना कर आध्यात्मिक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
15 जुलाई को होगी घटस्थापना
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई 2026 की दोपहर से प्रारंभ होकर 15 जुलाई की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 15 जुलाई को घटस्थापना का शुभ मुहूर्त माना गया है।
घटस्थापना के लिए सबसे शुभ समय सुबह 06:01 बजे से 10:17 बजे तक रहेगा। धार्मिक विद्वानों का मानना है कि इस अवधि में कलश स्थापना और देवी पूजन करने से विशेष पुण्यफल की प्राप्ति होती है।
प्रमुख शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:32 बजे से 05:16 बजे तक
घटस्थापना मुहूर्त: सुबह 06:01 बजे से 10:17 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:34 बजे से 03:25 बजे तक
अमृत काल: शाम 04:00 बजे से 05:27 बजे तक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन शुभ मुहूर्तों में की गई पूजा और साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है।
गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि को सामान्य नवरात्रों की तुलना में अधिक रहस्यमयी और साधना प्रधान माना जाता है। इस दौरान देवी के गूढ़ एवं शक्तिशाली स्वरूपों की उपासना की जाती है। विशेष रूप से दस महाविद्याओं की साधना करने वाले साधकों के लिए यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
मान्यता है कि इस अवधि में की गई उपासना से बाधाओं का निवारण होता है, आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि होती है तथा साधक की मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।
