शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने केंद्रीय ऊर्जा, आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। इस दौरान उन्होंने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से हिमाचल प्रदेश को देय बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित करने तथा विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीबीएमबी परियोजनाओं में राज्य को देय ऊर्जा बकाया राशि का भुगतान लंबे समय से लंबित है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप कर बकाया राशि दिलाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री के अनुसार यदि 31 अक्टूबर 2011 तक की 13,066 मिलियन यूनिट ऊर्जा बकाया राशि का भुगतान 6 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज सहित किया जाए तो यह राशि लगभग 7,784 करोड़ रुपये बनती है।
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के निर्माण के दौरान हिमाचल प्रदेश के लोगों ने विस्थापन और अन्य कठिनाइयों का सामना किया है। साथ ही राज्य को पर्यावरणीय प्रभावों का भी सामना करना पड़ा है। ऐसे में प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए बकाया राशि का भुगतान आवश्यक है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने शानन जलविद्युत परियोजना का मुद्दा भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि शानन परियोजना का करार समाप्त हो चुका है और इस परियोजना पर हिमाचल प्रदेश का वैध अधिकार है। उन्होंने केंद्र सरकार से परियोजना का नियंत्रण राज्य को दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कांगड़ा में प्रस्तावित ‘हिम चंडीगढ़’ और ‘एयरो सिटी’ परियोजनाओं के विकास के लिए भी वित्तीय सहायता मांगी। उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य प्रदेश में सुनियोजित शहरीकरण, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना, पर्यटन को प्रोत्साहित करना तथा निवेश आकर्षित करना है।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि राज्य सरकार द्वारा 24 शहरी स्थानीय निकायों में ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत 1,179 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रस्तावित की जा रही हैं। इनमें से 660 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रथम चरण में भारत सरकार को भेजी जा चुकी हैं। उन्होंने इन परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की परियोजनाओं में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाने का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं की प्रारंभिक अवधि पूर्ण हो चुकी है, उनमें हिमाचल प्रदेश को अतिरिक्त निशुल्क बिजली रॉयल्टी का लाभ दिया जाना चाहिए।
बैठक को राज्य के विकास, ऊर्जा हितों और शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

