
शिमला, 20 जून। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) में कर्मचारियों की लंबित वित्तीय देनदारियों और विभिन्न मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच चालक-परिचालक यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष मान सिंह ठाकुर के तबादले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। निगम प्रबंधन द्वारा जारी आदेश के बाद कर्मचारी संगठनों और यूनियन पदाधिकारियों ने नाराजगी जताई है तथा इसे आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश बताया है।
एचआरटीसी मुख्यालय शिमला से जारी आदेश के अनुसार चालक पद पर कार्यरत मान सिंह ठाकुर को ढली लोकल यूनिट, शिमला से चंबा यूनिट स्थानांतरित किया गया है। आदेश में इस तबादले को जनहित में लिया गया प्रशासनिक निर्णय बताया गया है। साथ ही उन्हें नियमानुसार यात्रा भत्ता और ज्वाइनिंग समय प्रदान करने का भी उल्लेख किया गया है।
मान सिंह ठाकुर लंबे समय से एचआरटीसी कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और अन्य वित्तीय देनदारियों के मुद्दों को लेकर मुखर रहे हैं। यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष के रूप में उन्होंने लगातार कर्मचारियों की समस्याओं को सरकार और निगम प्रबंधन के समक्ष उठाया है। ऐसे समय में जब यूनियन ने 25 जून से प्रदेशव्यापी हड़ताल और चक्का जाम की चेतावनी दी हुई है, तब उनके तबादले को लेकर कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है।
शनिवार को शिमला के ओल्ड बस स्टैंड परिसर में मान सिंह ठाकुर के नेतृत्व में चालक-परिचालकों ने धरना-प्रदर्शन कर लंबित मांगों को शीघ्र पूरा करने की मांग उठाई थी। प्रदर्शन के कुछ घंटों बाद ही उनके तबादले का आदेश सामने आने से मामला और गरमा गया है।
इस संबंध में मान सिंह ठाकुर ने कहा कि उनका तबादला कोई बड़ी बात नहीं है और वह इससे घबराने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि कर्मचारियों की मांगों और वित्तीय देनदारियों का समाधान ही उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि 23 जून को परिवहन मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री ने यूनियन प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया है।
उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार बातचीत के लिए बुला रही है और दूसरी ओर तबादले के आदेश जारी किए जा रहे हैं। इसके बावजूद यूनियन का फोकस कर्मचारियों के हितों और लंबित मांगों पर ही रहेगा।
मान सिंह ठाकुर ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ कर्मचारी उनके तबादले से नाराज होकर बसों का संचालन रोकने की बात कर रहे हैं, लेकिन वह व्यक्तिगत मुद्दे पर चक्का जाम के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि कर्मचारियों के अधिकारों और मांगों के लिए होना चाहिए।
