
शिमला। हिमाचल प्रदेश में करीब 27 वर्षों बाद राज्य लॉटरी की दोबारा शुरुआत का रास्ता लगभग साफ हो गया है। लॉटरी संचालन के लिए तैयार संशोधित प्रस्ताव अंतिम स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही अगले एक सप्ताह के भीतर लॉटरी संचालन के लिए इच्छुक कंपनियों से टेंडर आमंत्रित किए जाने की संभावना है।
सरकार ने लॉटरी संचालन के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए प्रावधानों के तहत सरकार की न्यूनतम सुनिश्चित आय को पहले प्रस्तावित तीन करोड़ रुपये से बढ़ाकर छह करोड़ रुपये कर दिया गया है। साथ ही टेंडर की शर्तों में भी संशोधन किया गया है, ताकि राज्य सरकार के राजस्व हित पूरी तरह सुरक्षित रह सकें।
लॉटरी विभाग का अनुमान है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य सरकार को एक वित्तीय वर्ष में लॉटरी से अधिकतम 50 करोड़ रुपये तक की आय हो सकती है। सरकार का मानना है कि इससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी और राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में वर्ष 1999 में राज्य लॉटरी पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके बाद राज्य में लॉटरी का संचालन पूरी तरह बंद हो गया था। प्रदेश की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने अगस्त 2025 में 27 वर्षों बाद लॉटरी योजना को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया था। अब संशोधित नियमों के साथ यह प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और सरकार को उम्मीद है कि जल्द ही प्रदेश में लॉटरी संचालन शुरू हो जाएगा।
