
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि यदि कोई महिला शादी के बाद किसी दूसरे राज्य में चली जाती है, तो वह केवल विवाह के आधार पर उस राज्य में अनुसूचित जाति (एससी) श्रेणी के आरक्षण या सरकारी नौकरी का लाभ लेने की पात्र नहीं होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति का दर्जा राज्य-विशिष्ट होता है और इसका लाभ उसी राज्य में मिलता है, जहाँ संबंधित जाति अधिसूचित है।
यह फैसला पंजाब की रहने वाली रीनू की याचिका पर आया। रीनू का जन्म पंजाब में अनुसूचित जाति परिवार में हुआ था। हिमाचल में विवाह के बाद उन्होंने टीजीटी (आर्ट्स) के एससी वर्ग के पद के लिए आवेदन किया, लेकिन उनकी उम्मीदवारी विभाग ने अस्वीकार कर दी। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया, जहाँ उनकी अपील भी खारिज कर दी गई।
हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के 2019 के ‘रंजना कुमारी बनाम उत्तराखंड राज्य’ फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को अनुसूचित जाति आरक्षण का लाभ उसी राज्य में मिलेगा, जहाँ उसकी जाति अधिसूचित है। केवल विवाह के कारण दूसरे राज्य में आरक्षण का अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता।
