
शिमला, 22 जून। हिमाचल प्रदेश में मिड-डे मील वर्कर्स ने सोमवार को अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्यव्यापी हड़ताल की। इस दौरान राजधानी शिमला में सैकड़ों महिला कर्मियों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने मानदेय बढ़ाने, 12 माह का वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी, सामाजिक सुरक्षा और सेवाओं के नियमितीकरण की मांग उठाई।
सीटू (CITU) से संबद्ध मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन के बैनर तले प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी शिमला पहुंचीं। प्रदर्शनकारियों ने टॉलैंड से राज्य सचिवालय तक रैली निकाली और सरकार पर उनकी वर्षों पुरानी मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
यूनियन नेताओं के अनुसार, प्रदर्शन में प्रदेशभर से 500 से 700 महिला कर्मियों ने भाग लिया। सचिवालय के बाहर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के एकत्र होने से कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ, जिसके चलते पुलिस को यातायात व्यवस्था संभालने के लिए विशेष इंतजाम करने पड़े।
यूनियन का आरोप है कि सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना के सफल संचालन में अहम भूमिका निभाने के बावजूद कर्मियों को मात्र 4,000 से 4,500 रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है, जो वर्तमान महंगाई के दौर में परिवार चलाने के लिए अपर्याप्त है। इसके अलावा, कई बार मानदेय का भुगतान महीनों तक लंबित रहता है तथा पूरे वर्ष कार्य करने के बावजूद केवल दस माह का ही भुगतान किया जाता है।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू की राज्य उपाध्यक्ष सुदेश ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों, यहां तक कि किन्नौर जैसे दूरदराज के क्षेत्रों से भी कर्मी आंदोलन में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि यूनियन ने 14 दिन पूर्व सरकार को हड़ताल का नोटिस दिया था, लेकिन मांगों पर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि अधिकांश मिड-डे मील कर्मी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से संबंध रखती हैं तथा कई महिलाएं अपने परिवार की एकमात्र कमाने वाली सदस्य हैं। बढ़ती महंगाई के बावजूद वर्षों से मानदेय में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं की गई है।
यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि कर्मियों को नियमित अवकाश का लाभ भी नहीं मिलता और अवकाश लेने पर मानदेय में कटौती कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने मिड-डे मील कर्मियों को 12 माह का वेतन और अवकाश लाभ देने के पक्ष में निर्णय दिया था, लेकिन सरकार ने इस निर्णय को लागू नहीं किया।
प्रदर्शन के दौरान यूनियन ने मासिक मानदेय को 4,500 रुपये से बढ़ाकर 7,000 रुपये करने, 12 माह का वेतन, न्यूनतम वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी, ईपीएफ तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने और सेवाओं के नियमितीकरण के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग की।
यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार शीघ्र उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। राज्यव्यापी हड़ताल ने मिड-डे मील कर्मियों के बीच बढ़ते असंतोष को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
