शिमला, 23 जून।
हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बुधवार आधी रात के बाद गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) चालक-परिचालक यूनियन ने सरकार के साथ हुई वार्ता विफल रहने के बाद 24 जून की मध्यरात्रि 12 बजे से प्रदेशव्यापी चक्का जाम का ऐलान किया है।
यूनियन का कहना है कि जब तक कर्मचारियों की लंबित वित्तीय मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता तथा प्रदेशाध्यक्ष मान सिंह ठाकुर के तबादले के आदेश को वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। यूनियन को एचआरटीसी टेक्निकल यूनियन और पेंशनर्स जॉइंट एक्शन कमेटी का भी समर्थन मिल गया है।
मंगलवार को सचिवालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव (परिवहन) के साथ हुई बैठक से पहले यूनियन नेताओं को उपमुख्यमंत्री के साथ वार्ता का आश्वासन दिया गया था। हालांकि, सचिवालय पहुंचने पर उन्हें बताया गया कि बैठक रद्द कर दी गई है और चर्चा एसीएस परिवहन के साथ होगी।
यूनियन के अनुसार बैठक के दौरान कर्मचारियों ने सबसे पहले प्रदेशाध्यक्ष मान सिंह ठाकुर के तबादले का मुद्दा उठाया, लेकिन इस पर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद यूनियन प्रतिनिधियों ने बैठक का बहिष्कार करते हुए चक्का जाम की घोषणा कर दी।
यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष मान सिंह ठाकुर ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि बुधवार रात 12 बजे के बाद बस सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, इसलिए लोग अग्रिम बुकिंग न कराएं और बसों के संचालन की उम्मीद में इंतजार भी न करें।
यूनियन का आरोप है कि करीब 12 हजार एचआरटीसी कर्मचारियों की कई वर्षों से लंबित वित्तीय मांगें अब तक पूरी नहीं हुई हैं। इनमें 75 महीने का नाइट ओवरटाइम एरियर, वर्ष 2016 से लंबित वेतन संशोधन का एरियर, महंगाई भत्ते की देनदारियां, 4-9-14 वेतनमान का लाभ, वर्दी भत्ता और अन्य वित्तीय मामलों का निपटारा शामिल है।
कर्मचारियों का दावा है कि केवल नाइट ओवरटाइम एरियर के रूप में ही लगभग 150 करोड़ रुपये बकाया हैं। इसके अलावा पदोन्नति प्रक्रिया लंबे समय से रुकी हुई है और विभिन्न श्रेणियों में भर्तियां भी लंबित हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि वेतन भी हर महीने निर्धारित समय पर नहीं मिल रहा है, जिससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।
