
शिमला। धर्मशाला से भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। आय से अधिक संपत्ति मामले के बाद अब उनके खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के खिलाफ शिमला में प्रदर्शन के दौरान विधायक द्वारा की गई कथित टिप्पणी से जुड़ा बताया जा रहा है।
वहीं, आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले में विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। जांच एजेंसी का फोकस अब केवल संपत्तियों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके वित्तीय स्रोत और लेन-देन का भी गहन सत्यापन किया जा रहा है।
चुनावी हलफनामे से बैंक खातों तक जांच
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी सुधीर शर्मा के चुनावी हलफनामों, आयकर रिटर्न, बैंक खातों, जमीन और भवनों से संबंधित दस्तावेजों के साथ-साथ निवेश तथा अन्य वित्तीय लेन-देन का मिलान कर रही है। जिन संपत्तियों अथवा लेन-देन से संबंधित रिकॉर्ड अधूरे या संदिग्ध पाए जा रहे हैं, उनके संबंध में संबंधित विभागों से अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।
विजिलेंस ने जांच के दौरान करीब 20 प्रमुख वित्तीय बिंदुओं की सूची तैयार की है। इनमें आयकर रिटर्न, चुनावी हलफनामे, बैंक खाते, नकद एवं डिजिटल लेन-देन, निवेश, कृषि आय, वाहन, ऋण, कंपनियों अथवा साझेदारी में हिस्सेदारी तथा पारिवारिक सदस्यों के नाम पर दर्ज संपत्तियां शामिल हैं।
जांच एजेंसी इन सभी बिंदुओं का स्वतंत्र रूप से सत्यापन कर रही है। डिजिटल विश्लेषण के बाद अब दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन भी शुरू किया गया है। राजस्व रिकॉर्ड, रजिस्ट्री, बैंक दस्तावेज और अन्य अभिलेखों का मूल रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है।
लेन-देन के स्रोत की भी होगी पड़ताल
विजिलेंस का मुख्य जोर यह पता लगाने पर है कि संबंधित संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन के लिए धन का स्रोत क्या रहा। यदि किसी लेन-देन या संपत्ति से संबंधित रिकॉर्ड में विसंगति मिलती है, तो संबंधित विभागों से अतिरिक्त जानकारी मांगी जा सकती है। जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्तियों के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं।
विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, जांच कानून के दायरे और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों के संबंध में अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
