
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के बीच प्रस्तावित FCRA संशोधन विधेयक को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सोमवार से अपने सभी सांसदों की सदन में अनिवार्य मौजूदगी सुनिश्चित करने की रणनीति बनाई है। माना जा रहा है कि विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच संसद में तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
खरगे के कार्यालय में अहम बैठक
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यालय में शुक्रवार सुबह विपक्षी दलों की अहम बैठक हुई। बैठक में कांग्रेस नेतृत्व ने सहयोगी दलों से अपने सांसदों को सोमवार से सदन में पूरी ताकत के साथ उपस्थित रखने का आग्रह किया। विपक्षी गठबंधन के कई दलों ने इस रणनीति का समर्थन किया है।
विपक्ष का कहना है कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को स्वयं सदन में बयान देना चाहिए। इस मांग को लेकर मानसून सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष और सरकार के बीच कई बार गतिरोध उत्पन्न हो चुका है।
कांग्रेस बोली- चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार
कांग्रेस के लोकसभा व्हिप मणिकम टैगोर ने कहा कि पार्टी परिसीमन और FCRA विधेयक पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री लंबे समय से सदन में उपस्थित नहीं हैं और सरकार अन्य मुद्दों के जरिए जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।
समाजवादी पार्टी ने भी विपक्ष की रणनीति का समर्थन किया है। पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा कि जरूरत पड़ने पर सपा भी अपने सांसदों के लिए औपचारिक व्हिप जारी कर सकती है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने भी अपने सांसदों को सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
FCRA विधेयक के प्रावधानों पर उठे सवाल
FCRA संशोधन विधेयक को लेकर कुछ संगठनों में चिंता जताई जा रही है। विवाद मुख्य रूप से FCRA पंजीकरण समाप्त हो चुके संगठनों की संपत्तियों से जुड़े प्रस्तावित प्रावधानों को लेकर है। विपक्ष और संबंधित संगठनों की ओर से आशंका जताई गई है कि कुछ प्रावधान पिछली तारीख से प्रभावी हो सकते हैं।
हालांकि, मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद दावा किया कि उन्हें आश्वासन मिला है कि विधेयक में कोई दंडात्मक रेट्रोस्पेक्टिव प्रावधान नहीं रखा जाएगा।
13 अगस्त को खत्म होना है मानसून सत्र
संसद का मौजूदा मानसून सत्र निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 13 अगस्त को समाप्त होना है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू स्पष्ट कर चुके हैं कि फिलहाल सत्र की अवधि बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
इस बीच, राज्यसभा के सभापति एवं उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने संसदीय कार्य मंत्री से विपक्ष की भावनाओं से गृह मंत्री को अवगत कराने और सदन में उनकी उपस्थिति की मांग पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है।
अब निगाहें संसद पर टिकी हैं कि FCRA संशोधन विधेयक कब सदन में आता है और इस पर सरकार तथा विपक्ष के बीच बहस किस रूप में सामने आती है।
