
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने करुणामूलक रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे सैकड़ों परिवारों को बड़ी राहत दी है। वित्त विभाग ने एकमुश्त विशेष छूट के तहत उन मामलों की दोबारा समीक्षा करने का निर्णय लिया है, जिन्हें पहले केवल परिवार की गैर-निर्धनता के आधार पर अस्वीकार कर दिया गया था।
वित्त विभाग द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन के बाद उच्च शिक्षा निदेशालय ने सभी उपनिदेशकों तथा सरकारी महाविद्यालयों को निर्देश जारी करते हुए पात्र आश्रितों से नए आवेदन आमंत्रित किए हैं। पात्र अभ्यर्थियों को 31 दिसंबर 2026 तक संबंधित विभागाध्यक्ष के समक्ष अपना आवेदन प्रस्तुत करना होगा।
सरकार के अनुसार, ऐसे मामलों में परिवार की वर्तमान आर्थिक स्थिति का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा। यदि जांच में आश्रित अब भी आर्थिक संकट से जूझता पाया जाता है, तो उसे करुणामूलक नियुक्ति के लिए पात्र माना जा सकेगा।
हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह विशेष राहत केवल उन मामलों पर लागू होगी, जिन्हें पहले केवल आर्थिक रूप से निर्धन न पाए जाने के कारण खारिज किया गया था। जिन आवेदनों को अन्य किसी कारण से अस्वीकार किया गया था, उन्हें इस प्रक्रिया के तहत दोबारा नहीं खोला जाएगा।
वित्त विभाग ने पुनर्विचार की प्रक्रिया के लिए छह माह की समय-सीमा निर्धारित की है। सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि आवेदन प्राप्त होने के एक माह के भीतर मामलों का निपटारा करें तथा पात्र पाए जाने वाले आश्रितों की नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
करुणामूलक नियुक्तियां प्रत्यक्ष भर्ती कोटे में उपलब्ध पदों पर की जाएंगी। विभागीय स्तर पर पात्रता और दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद अंतिम नियुक्ति से पहले मुख्यमंत्री की स्वीकृति अनिवार्य होगी। स्वीकृति मिलने के बाद ही नियुक्ति पत्र जारी किए जाएंगे।
उच्च शिक्षा निदेशक ने सभी उपनिदेशकों, सरकारी महाविद्यालयों के प्राचार्यों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे पूर्व में अस्वीकृत एवं लंबित मामलों की जानकारी पात्र आश्रितों तक पहुंचाएं तथा इस प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध ढंग से पूरा करें।
