
शिमला। वर्ष 2011 में तत्कालीन धूमल सरकार के कार्यकाल में लागू किया गया हिमाचल प्रदेश पब्लिक सर्विस गारंटी एक्ट करीब 15 वर्ष बाद भी पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाया है। अधिनियम का उद्देश्य आम लोगों को तय समयसीमा में सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना था, लेकिन अधिकांश विभागों ने वर्षों से अपनी अधिसूचित सेवाओं को अपडेट नहीं किया है। सूचना प्रौद्योगिकी के दौर में अनेक सेवाएं ऑनलाइन होने के बावजूद उन्हें अभी तक अधिनियम के दायरे में शामिल नहीं किया गया है।
शुरुआती वर्षों में राजस्व, परिवहन, नगर निकाय, पंचायती राज, ग्रामीण विकास, उद्योग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, बिजली, जल शक्ति, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित कई विभागों ने अपनी सेवाओं को अधिसूचित किया था। इनमें आय, जाति, हिमाचली बोनाफाइड, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन संबंधी सेवाएं, बिजली-पेयजल कनेक्शन, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और राशन कार्ड जैसी सेवाएं शामिल हैं।
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में नई डिजिटल सेवाओं को अधिनियम में शामिल नहीं किया गया। वहीं, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों के पद लंबे समय तक रिक्त रहने तथा लंबित अपीलों के कारण दूसरी अपीलों के निस्तारण पर भी असर पड़ा।
सरकार अब सभी विभागों के सेवा पोर्टलों को ऑटोमेटेड प्रणाली से जोड़ रही है। लक्ष्य है कि अगस्त तक सभी विभाग इस व्यवस्था से जुड़ जाएं। नई प्रणाली लागू होने के बाद यदि किसी सेवा का निर्धारित समय में निस्तारण नहीं होगा, तो संबंधित शिकायत स्वतः पोर्टल पर दर्ज हो जाएगी। इससे पब्लिक सर्विस गारंटी एक्ट का प्रभावी क्रियान्वयन और सरकारी सेवाओं की जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
