
शिमला, 22 जून। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और भूमि खरीद-फरोख्त को लेकर सामने आ रही कथित अनियमितताओं के बीच हिमाचल प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि यदि चंदे के उपयोग में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है, तो इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
शिमला में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मंत्री ने कहा कि देशभर के लोगों ने भगवान राम के प्रति आस्था और विश्वास के चलते मंदिर निर्माण के लिए उदारतापूर्वक दान दिया था। ऐसे में दान राशि के उपयोग में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मीडिया में मंदिर निर्माण और उससे जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित जो खबरें सामने आ रही हैं, यदि उनमें सच्चाई है, तो यह करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ गंभीर खिलवाड़ होगा।
राजस्व मंत्री ने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के नाम पर एकत्र किए गए धन के दुरुपयोग की खबरें समाज और देश दोनों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण हैं तथा इससे धार्मिक संस्थाओं की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।
मंत्री ने यह भी कहा कि मंदिरों में दान देना श्रद्धालुओं की व्यक्तिगत आस्था का विषय है, लेकिन समाज कल्याण, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में भी लोगों को बढ़-चढ़कर योगदान देना चाहिए, ताकि जरूरतमंद लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।
उन्होंने धार्मिक संस्थाओं के संचालन में पारदर्शी व्यवस्था अपनाने पर बल देते हुए कहा कि धार्मिक गतिविधियों और मंदिर प्रबंधन को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए, जिससे आम लोगों का विश्वास कायम रह सके।
