
आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी इस वर्ष विशेष खगोलीय संयोग के कारण दो अलग-अलग तिथियों पर मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि की स्थिति के चलते स्मार्त (गृहस्थ) और वैष्णव परंपरा के श्रद्धालु अलग-अलग दिन व्रत रखेंगे। ऐसे में व्रत की सही तिथि को लेकर कई श्रद्धालुओं के मन में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
डॉ सुरेश कुमार शर्मा ने बताया कि एकादशी तिथि 10 जुलाई को सुबह 8:16 बजे प्रारंभ होगी और 11 जुलाई को सुबह 5:22 बजे समाप्त होगी। शास्त्रों के अनुसार, स्मार्त (गृहस्थ) श्रद्धालु 10 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत रखेंगे, जबकि वैष्णव एवं संन्यासी परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालु 11 जुलाई को व्रत करेंगे।
उन्होंने बताया कि 10 जुलाई को व्रत रखने वाले श्रद्धालु 11 जुलाई को सुबह 7:12 बजे से 8:57 बजे के बीच पारण कर सकते हैं। वहीं, 11 जुलाई को व्रत करने वाले वैष्णव श्रद्धालु 12 जुलाई को सुबह 5:32 बजे से 8:18 बजे के बीच पारण करेंगे।
डॉ सुरेश कुमार शर्मा ने श्रद्धालुओं से अपनी-अपनी परंपरा के अनुसार व्रत का पालन करने तथा पारण निर्धारित समय पर करने का आग्रह किया है।
