
हिमाचल प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था के सामने शिक्षकों की कमी एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। प्रदेश के स्कूलों में हजारों शिक्षक और सैकड़ों प्रधानाचार्यों के पद रिक्त होना चिंता का विषय है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विद्यालयों में पहले से ही शिक्षकों की कमी है, तो एक स्कूल से दूसरे स्कूल में डेपुटेशन करके आखिर कब तक व्यवस्था चलाई जाएगी?
डेपुटेशन किसी आपात स्थिति में अस्थायी समाधान हो सकता है, लेकिन इसे स्थायी व्यवस्था बना देना विद्यार्थियों के हित में नहीं है। एक विद्यालय से शिक्षक को दूसरे विद्यालय में भेजने से वहां की कमी तो कुछ हद तक पूरी हो सकती है, लेकिन जिस स्कूल से शिक्षक हटता है, वहां पढ़ाई प्रभावित होती है। इस तरह समस्या का समाधान होने के बजाय उसका स्थानांतरण मात्र हो जाता है।
सबसे अधिक चिंता उन विद्यार्थियों को लेकर है, जो बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। शैक्षणिक सत्र के महत्वपूर्ण समय में यदि विषय विशेषज्ञ शिक्षक उपलब्ध न हों तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की तैयारी और परिणाम पर पड़ सकता है। ग्रामीण और दूरदराज के स्कूलों में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
शिक्षकों पर अध्यापन के अलावा प्रशासनिक और गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ भी कम किया जाना चाहिए। शिक्षक का मूल दायित्व विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है। यदि उसका अधिकांश समय कागजी कार्रवाई, विभागीय गतिविधियों और अतिरिक्त जिम्मेदारियों में चला जाएगा, तो कक्षा में विद्यार्थियों को पर्याप्त समय देना कठिन होगा।
सरकार और शिक्षा विभाग को अब अस्थायी इंतजामों के बजाय स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। रिक्त पदों को शीघ्र भरना, विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना, प्रधानाचार्यों और स्कूल प्रमुखों के रिक्त पद भरना तथा डेपुटेशन की स्पष्ट और पारदर्शी नीति बनाना समय की मांग है।
बच्चों की शिक्षा किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था से अधिक महत्वपूर्ण है। स्कूलों की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि किसी एक विद्यालय को शिक्षक देने के लिए दूसरे विद्यालय के विद्यार्थियों के साथ अन्याय न हो। हिमाचल को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ना है तो सबसे पहले कक्षाओं में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराने होंगे।
शिक्षा में निवेश केवल भवन बनाने या योजनाएं शुरू करने से नहीं होता; असली निवेश योग्य शिक्षक और उन्हें पर्याप्त शिक्षण समय उपलब्ध कराने में है।
