शिमला। राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन, लगातार बढ़ता वैश्विक तापमान और पर्यावरण प्रदूषण आज पूरी दुनिया के सामने गंभीर चुनौती बनकर उभरे हैं। इन समस्याओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देना तथा बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब तक आम नागरिक पर्यावरण संरक्षण की मुहिम से सक्रिय रूप से नहीं जुड़ेंगे, तब तक इन चुनौतियों का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
राज्यपाल ने यह विचार एक पौधरोपण कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश प्रकृति की अनुपम देन है। यहां के घने वन, हिमालय की पर्वत श्रृंखलाएं, निर्मल नदियां और समृद्ध जैव विविधता प्रदेश की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर हैं। इन संसाधनों का संरक्षण केवल सरकार का ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व भी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं और समाज के हर वर्ग को इसमें अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
राज्यपाल ने विशेष रूप से विद्यार्थियों और युवाओं से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी यदि प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनेगी तो आने वाली पीढ़ियों को भी स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। किसी भी पौधरोपण अभियान की सफलता इस बात से तय होती है कि लगाए गए पौधों में कितने पौधे बड़े होकर वृक्ष का रूप धारण करते हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी जिम्मेदारी भी स्वयं निभाए। इससे हरित क्षेत्र में वृद्धि होगी, पर्यावरण संतुलित रहेगा तथा जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में भी मदद मिलेगी।
समारोह में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भी पर्यावरण संरक्षण को समय की आवश्यकता बताते हुए लोगों से अधिक जागरूक और जिम्मेदार बनने का आह्वान किया। उन्होंने प्रार्थना सोशल वेलफेयर सोसायटी की इस सराहनीय पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे अभियान समाज में पर्यावरण के प्रति सकारात्मक संदेश देने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के सिद्धांतों के अनुरूप आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहे।
विक्रमादित्य सिंह ने सुझाव दिया कि प्रत्येक विद्यार्थी एक पौधा गोद लेकर उसकी देखभाल की जिम्मेदारी उठाए। इससे न केवल पौधरोपण अभियान सफल होंगे, बल्कि विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता भी विकसित होगी। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण, अंधाधुंध विकास और वन क्षेत्रों में कमी के कारण जंगली जानवर मानव बस्तियों की ओर आने को मजबूर हो रहे हैं। यह स्थिति पर्यावरणीय असंतुलन का संकेत है, जिसे समय रहते गंभीरता से समझने की आवश्यकता है।
