नगर निगम शिमला के मेयर सुरेंद्र चौहान का कार्यकाल बढ़ाने से जुड़ा मामला मंगलवार को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में फिर से सुना गया। एडवोकेट अंजली सोनी वर्मा ने इस मामले में याचिका दायर करते हुए राज्य सरकार के फैसले को असंवैधानिक करार दिया है। याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार द्वारा नगर निगम मेयर का कार्यकाल ढाई साल से बढ़ाकर पांच साल करने का निर्णय संविधान के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों ने भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की। भाजपा पार्षद आशा शर्मा, कमलेश मेहता और सरोज ठाकुर ने खुद को इस मामले में पक्षकार के रूप में स्वीकार करने को लेकर आवेदन दाखिल किया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और नगर निगम मेयर को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई अब 27 नवंबर को होगी। हाल ही में हुई हिमाचल प्रदेश कैबिनेट की बैठक में शिमला नगर निगम मेयर का कार्यकाल ढाई साल से बढ़ाकर पांच साल करने का निर्णय लिया गया था। सरकार के इस फैसले को लेकर अब अदालत में संवैधानिक बहस शुरू हो गई है।
