शिमला में 24 घंटे पेयजल उपलब्ध कराने के लिए चलाई जा रही सतलुज पेयजल आपूर्ति योजना बजट संकट से जूझ रही है। विश्व बैंक इस परियोजना के लिए अब तक 587 करोड़ रुपये जारी कर चुका है, लेकिन पेयजल कंपनी के पास सिर्फ 250 करोड़ रुपये ही पहुंचे हैं। शेष लगभग 300 करोड़ रुपये कहां अटके हैं, इस पर किसी भी स्तर पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा।बजट की कमी के चलते अब कंपनी 100 करोड़ रुपये ऋण लेने की तैयारी कर रही है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है, जिसे मंजूरी के लिए अगली सप्ताह मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली निदेशक मंडल की बैठक में रखा जाएगा। मंजूरी मिलते ही ऋण लेने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।370 करोड़ की पहले चरण की परियोजना, दूसरे चरण में 970 करोड़ का कार्य जारीविश्व बैंक की सहायता से शिमला में पेयजल और सीवरेज नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है।पहला चरण (370 करोड़ रुपये): सतलुज से शिमला तक पानी लाने का कार्य लगभग पूरा।दूसरा चरण (970 करोड़ रुपये): पूरे शहर में 24 घंटे प्रेशर के साथ पानी उपलब्ध कराने के लिए नई पाइपलाइन और टैंकों का निर्माण।229 करोड़ रुपये: सीवरेज नेटवर्क विस्तार पर खर्च।शहर के 36 हजार उपभोक्ताओं को अगले वर्ष से 24 घंटे पानी मिलने का दावा किया जा रहा है। शकरोड़ी क्षेत्र में इन दिनों टैंकों और सप्लाई लाइनों की टेस्टिंग चल रही है। जनवरी से सतलुज का पानी शिमला पहुंचाने की तैयारी है।587 करोड़ मिलने के बाद भी ऋण क्यों? उठ रहे सवाल—पिछले तीन वर्षों में विश्व बैंक से किस्तों के रूप में 587 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। इस वर्ष भी करीब 100 करोड़ रुपये जारी होने हैं। इसके बावजूद कंपनी को ऋण लेने की जरूरत पड़ रही है, जिस पर अब सवाल उठने लगे हैं। अधिकारियों के पास इस बात का भी स्पष्ट उत्तर नहीं है कि करीब 300 करोड़ रुपये आखिर कहां रुके हैं।
