शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में आउटसोर्सिंग के आधार पर नियुक्त कंप्यूटर शिक्षकों को नियमित करने का मामला एक बार फिर गरमा गया है। प्रदेश सरकार हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने की तैयारी में है। शिक्षा विभाग ने विधि विभाग से राय मांगी थी, जिसके बाद विभाग ने आदेश को चुनौती देने के लिए सरकार को अनुमति दे दी है।
हाईकोर्ट ने नियमित करने का आदेश दिया था—
हाईकोर्ट ने आउटसोर्सिंग आधारित कंप्यूटर शिक्षकों को नियमित करने के निर्देश दिए थे। राज्य में करीब 1326 कंप्यूटर प्रशिक्षक वर्षों से सेवाएँ दे रहे हैं। इन्हें 2000–2001 के बीच सूचना प्रौद्योगिकी शिक्षा योजना (आईटीईडी) के तहत आउटसोर्स आधार पर स्कूलों में तैनात किया गया था।
विभाग का तर्क— आउटसोर्स कर्मचारी नियमितीकरण के पात्र नहीं—
विधि विभाग ने स्पष्ट किया है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को सरकार सीधे नियुक्त नहीं करती, इसलिए वे नियमितीकरण के पात्र नहीं बनते। विभाग ने यह भी माना कि भले ही शिक्षकों ने लंबा समय सेवा में दिया हो, लेकिन आउटसोर्स कर्मचारी नियमित नियुक्ति के दायरे में नहीं आते।
जनवरी 2016 में दायर हुई थी याचिका—
याचिकाकर्ताओं ने 2016 में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने तर्क दिया था कि वे वर्षों से कार्यरत हैं और उन्हें नियमित किया जाए। इसके विरोध में सरकार ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारी होने के कारण उनका नियमितीकरण संभव नहीं है, हालांकि सेवाएं जारी रखने का निर्णय सरकार अपने स्तर पर ले सकती है।
सरकार तैयार कर रही अपील—
सूत्रों के अनुसार, शिक्षा विभाग हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने की तैयारी में जुट गया है। विभाग का मानना है कि यह मामला राज्य में आउटसोर्सिंग से जुड़े अन्य मामलों को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए जल्द ही उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी जाएगी।
