
हिमाचल प्रदेश सरकार ने दुर्गम, जनजातीय, कठिन और अति दुर्गम क्षेत्रों में कर्मचारियों की तैनाती एवं तबादला नीति में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। नई व्यवस्था के अनुसार 55 वर्ष से अधिक आयु के अधिकारियों और कर्मचारियों को यथासंभव ऐसे क्षेत्रों में स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। हालांकि, पदोन्नति के मामलों में यह छूट लागू नहीं होगी और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित कर्मचारी को वहां कार्यभार संभालना होगा।
कार्मिक विभाग द्वारा जारी संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार इन क्षेत्रों में सामान्य कार्यकाल तीन वर्ष रहेगा, जिसमें दो सर्दियां और तीन गर्मियां शामिल होंगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कार्यकाल की गणना केवल कर्मचारी की वास्तविक तैनाती अवधि के आधार पर की जाएगी।
यदि कोई कर्मचारी लंबी छुट्टी पर रहता है या किसी अन्य कारण से सेवा से अनुपस्थित रहता है, तो वह अवधि कार्यकाल में नहीं जोड़ी जाएगी। ऐसे कर्मचारियों को निर्धारित तीन वर्ष की वास्तविक सेवा पूरी करने के लिए अतिरिक्त अवधि तक संबंधित क्षेत्र में कार्य करना होगा।
सरकार ने अतिरिक्त प्रभार को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। यदि कोई अधिकारी किसी दुर्गम या जनजातीय क्षेत्र का केवल अतिरिक्त प्रभार संभालता है और वहां नियमित रूप से नियुक्त नहीं है, तो उस अवधि को न तो कार्यकाल में गिना जाएगा और न ही दुर्गम क्षेत्र में सेवा से मिलने वाली किसी रियायत, वरीयता, प्रोत्साहन या अन्य लाभ के लिए मान्य माना जाएगा।
कार्मिक विभाग ने सभी विभागों, बोर्डों, निगमों, विश्वविद्यालयों तथा जिला प्रशासन को संशोधित प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं। सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से तबादला नीति को अधिक पारदर्शी और व्यावहारिक बनाया जा सकेगा।
