शिमला। हिमाचल प्रदेश में बढ़ते वित्तीय अपराधों, साइबर धोखाधड़ी और अवैध जमा योजनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), राज्य सरकार तथा विभिन्न नियामक एवं प्रवर्तन एजेंसियों ने संयुक्त रणनीति तैयार की है। इस संबंध में राज्य स्तरीय समन्वय समिति (एसएलसीसी) की 21वीं बैठक आयोजित की गई, जिसमें निवेशकों के हितों की सुरक्षा और वित्तीय धोखाधड़ी की रोकथाम पर व्यापक चर्चा हुई।
बैठक की अध्यक्षता प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार ने की, जबकि आयोजन आरबीआई के हिमाचल प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय के क्षेत्रीय निदेशक अनुपम किशोर की ओर से किया गया।
बैठक में राज्य में अनधिकृत रूप से जमा राशि स्वीकार करने वाली संस्थाओं की गतिविधियों, साइबर धोखाधड़ी के मौजूदा स्वरूप तथा सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। सदस्यों ने निवेशकों को ठगने के लिए अपनाए जा रहे नए तरीकों, बदलते साइबर अपराधों और हाल में किए गए नियामकीय एवं प्रवर्तन उपायों पर भी विचार-विमर्श किया।
बैठक में विभिन्न नियामक और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, त्वरित सूचना साझा करने और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने पर सहमति बनी। साथ ही, लोगों को वित्तीय धोखाधड़ी और अवैध निवेश योजनाओं से सतर्क करने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने का भी निर्णय लिया गया।
