
शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के लिए नई औद्योगिक नीति का प्रारूप तैयार कर लिया है। इस नीति को जल्द ही राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। नई नीति का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब उद्योगों को मशीनरी खरीद पर सब्सिडी देने के बजाय उनके वास्तविक उत्पादन के आधार पर प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
सरकार का मानना है कि पूर्व की व्यवस्था में कई उद्योगों ने मशीनरी पर मिलने वाली 10 से 30 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ तो लिया, लेकिन अपेक्षित स्तर पर उत्पादन नहीं किया। नई व्यवस्था से केवल वही उद्योग लाभान्वित होंगे जो निर्धारित मानकों के अनुसार उत्पादन करेंगे। इससे फर्जी या नाममात्र के उत्पादन पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और औद्योगिक विकास को वास्तविक गति मिलेगी।
नई औद्योगिक नीति में निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को भी सरल बनाया गया है। उद्योग स्थापित करने के लिए आवश्यक विभिन्न अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) अब 15 दिनों के भीतर जारी करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही सिंगल विंडो सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि निवेशकों को सभी आवश्यक स्वीकृतियां एक ही मंच पर उपलब्ध हो सकें।
सरकार का विशेष फोकस एमएसएमई क्षेत्र पर रहेगा। छोटे उद्योगों के लिए पूंजी निवेश, रोजगार सृजन तथा आधुनिक तकनीक अपनाने वाले उद्यमों को विशेष प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ग्रीन इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की योजना भी शामिल की गई है। ऊर्जा दक्षता, स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण अनुकूल तकनीक अपनाने वाले उद्योगों को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा।
