हिमाचल प्रदेश | हिमाचल प्रदेश के सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में प्रिंसिपलों की नियुक्ति अब लिखित परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद ही की जाएगी। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि स्कूलों में प्रशासनिक गुणवत्ता सुधारने के लिए टेस्ट पास करना अनिवार्य होगा। राज्य में पहली बार शिक्षकों तथा उपप्रधानाचार्यों के साथ प्रधानाचार्यों के लिए भी परीक्षा की व्यवस्था लागू की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन समितियों को निर्देश जारी किए हैं कि भविष्य में किसी भी शिक्षक या प्रधानाचार्य की तैनाती मेरिट प्रक्रिया के आधार पर ही की जाए। विभाग का कहना है कि निजी तथा सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षण स्तर को मजबूत बनाने के लिए यह कदम आवश्यक है।
उपप्रधानाचार्यों की भी होगी परीक्षा–
चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए अब उपप्रधानाचार्यों की नियुक्ति भी टेस्ट के माध्यम से की जाएगी। बताया जा रहा है कि यह परीक्षा सीबीएसई पैटर्न पर आधारित होगी, जिसमें शैक्षणिक योग्यता, प्रशासनिक क्षमता और नेतृत्व कौशल का मूल्यांकन किया जाएगा। परीक्षा परिणाम के आधार पर ही योग्य अभ्यर्थियों का चयन होगा।
शिक्षकों को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण—
निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाएगा। शिक्षा विभाग ने सभी उपमंडल व जिला स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रशिक्षण में किसी भी प्रकार की कमी न रहे। विभाग का कहना है कि आधुनिक शैक्षणिक तकनीक और प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने के लिए यह प्रशिक्षण अनिवार्य है।
58 वर्ष से अधिक आयु वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी होंगे रिटायर—
हिमाचल शिक्षा विभाग ने 58 वर्ष से अधिक आयु वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग को मिली रिपोर्ट के आधार पर उन कर्मचारियों की सूची तैयार की गई है, जिनकी उम्र 58 वर्ष से पार हो चुकी है।
